चेले और शागिर्द

बुधवार, 2 मार्च 2011

नेता जी की करामातें !


हर चाल मैं चलता हूँ ,चुनाव जीत जाऊं  ;
मैं नोट बांटता हूँ ,मदिरा भी मैं पिलाऊं ;
यूँ हाथ जोड़ता हूँ पर दंगें भी  कराऊँ ;
क्या-क्या हैं करामातें !अब और क्या बताऊँ ?
                                                                  शिखा  कौशिक
                                 http://netajikyakahtehain.blogspot.com/

3 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत पैने कटाक्ष कर रही हैं आप.बहुत खूब..

यशवन्त माथुर ने कहा…

सच है इतना सब करने के बाद भी अगर यह नेता जी चुनाव हार जाएँ तो? :(

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

ज़रूरत पड़े तो मां बाप तक को बेच आऊं,
बस मैं अपना चुनाव जीत जाऊं

बहुत सुन्दर