चेले और शागिर्द

गुरुवार, 30 जून 2011

मनमोहन के तेवर !

मनमोहन के तेवर !


''मौन तोड़ता हूँ अपना,बात सुनो अब मेरी ,
न तो मैं कमजोर  हूँ ;न पद मेरी कमजोरी ,
अन्ना तो कठपुतली हैं ;किसी और हाथ है डोरी ,
मैं करता खुलेआम सब ,नहीं किसी से चोरी .''

                                           शिखा कौशिक http://netajikyakahtehain.blogspot.com

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

शरम मगर हमको आती नहीं है.....

शालिनी कौशिक ने कहा…

manmohan ji ne kahi ab bade pate ki bat,
ab dekhen dikhlayega vipaksh kaise halat.
bahut badhiya likha hai shikha ji.badhai.

veerubhai ने कहा…

ओ हो !खेत में खड़े बिजूके भी बोलतें हैं .जो बोलना तो चाहतें हैं ,आवाज़ नहीं निकलती .

anshumala ने कहा…

मनमोहन जी दांत के डाक्टर के पास गए डाक्टर ने कहा अब यहाँ तो मुंह खोलो !!!