चेले और शागिर्द

बुधवार, 6 जून 2012

डिम्पल-सभी दलों की भाभी ?

डिम्पल-सभी दलों की भाभी ?
 
 
 राजनीति एक   कोठरी  ;नेता  रखते  चाबी   ;
स्व  हित में  दायें   बाएं  ;जैसे चाहे  घुमा  दी   ;
भोली   जनता   क्या   जाने   वो है  सीधी-सादी     ;
डिम्पल कैसे बन गयी  सभी   दलों की  भाभी  !
                shikha  kaushik  

मंगलवार, 5 जून 2012

नितिन को 'राजयोग' की प्यास

झुक कर मांग रहे बाबा से   नितिन वही वरदान  ;
जिसकी  खातिर  छोड़ा  बाबा  ने  स्वयं  योग  व् ध्यान  ;
योगासन  की नहीं  नितिन  को  ''राजयोग ' की प्यास  ;
वो वर  कैसे  दे   बाबा  जो खुद  नहीं  उनके  पास !

                  शिखा कौशिक

शुक्रवार, 25 मई 2012

मध्यावधि- चुनाव कौन चाहता है ?


मध्यावधि- चुनाव कौन चाहता है ?

जनता...नहीं केवल अवसरवादी विपक्षी दल .


जिनके लिए है 


राजनीति खिलता हुआ कमल ;


जनता को पता है 


ये है दलदल 


जिसमे कोई भी हो दल 


जनता के साथ करता है छल ;


समस्याओं को सुलझाने में 


रहते हैं विफल ;


हर काम को टाल देते हैं 


आज नहीं कल

 ,
फिर चुनावों के लिए 


क्यों हो रहे विकल ;


शायद लग जाये लॉटरी 


और खटारा गाड़ी भी 


इस बार धक्के देकर 


जाये निकल 

.
shikha kaushik

शुक्रवार, 11 मई 2012

काला धन न सफ़ेद हुआ बाबा के बाल सफ़ेद !


[ अमर  उजाला  दैनिक 11 मई  2012 पेज  11 ]
  काला  धन  न  सफ़ेद हुआ  बाबा  के  बाल सफ़ेद  !


राजनीति की कोठरी   में  छिपे हुए हैं भेद ,
ऐसी छलनी में क्या छने जिसके हो छोटे  छेद ,
काले  धन को लेकर बाबा को है बड़ा खेद  ;
इस चक्कर  में हो  गए  उनके  बाल  सफ़ेद  .

                              शिखा  कौशिक 

बुधवार, 2 मई 2012

दर्शन देना राज्य सभा में ''क्रिकेट के भगवान् ''


बाल  ठाकरे ने  दिया इसे ''डर्टी पिक्चर'' नाम ;
 रामदेव   चिंतित हुए छोड़ा  योग  व्  ध्यान  ;
मगर हमारी  तरफ  से मुबारक  हो  सम्मान  ;
दर्शन देना राज्य सभा में ''क्रिकेट के भगवान् ''

                                               शिखा   कौशिक

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

गंगा माँ पर भी राजनीति-शर्मनाक !

गंगा माँ पर भी राजनीति-शर्मनाक  !

एक  ओर स्वामी '' अभि''  दूसरी ओर  ''बहुगुणा''  ;
चकित  होकर दोनों को सुनती   गंगा माँ ;
एक कह रहा  माता को अब मत करो प्रदूषित   ;
मगर जरूरी दूसरे  को उद्योगपति  का हित .

                                          शिखा कौशिक 

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

...व्हाट्स गोइंग ऑन ? [नेता जी क्या कहते हैं ?]






करप्शन  मिटाने  को  जो  आते  हैं आगे  
वे  भी  तो पैसे  के पीछे  हैं भागे  
पैसा  लुभाता  है ...सबको  नाचता  है 
इसकी कशिश ऐसी  मन  डोल  जाता  है 
लेने   न   देता   है पल   भर का चैन 
व्हाट'स  गोइंग ऑन  मैन  ....व्हाट्स  गोइंग ऑन


आया इलेक्शन  तो सिर पर बिठाते हैं
वादों के चश्मे  से  जन्नत  दिखाते  हैं ;
सत्ता मिली  ज्यों  ही  मुंह  मोड़  लेते  हैं 
अपने  किये  वादे  खुद  तोड़  देते है ,
फिर  रोज करते हैं ये तो स्कैम 
व्हाट'स गोइंग ऑन मैन ....व्हाट्स गोइंग ऑन 


                                                शिखा  कौशिक  
                                      [नेता जी क्या कहते हैं ?]