चेले और शागिर्द

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

नेता जी की परेशानी

नेता   जी   की  परेशानी 
       कभी नेता जी कहकर जो सिर पर बिठाते थे ,
        बड़ा सम्मान देकर अपने घर बुलाते थे ,
      चरण छूते थे और जान भी लुटाते थे  ,
     वही जनता हमें अब आँख क्यों दिखाती है ?
    मेरी रैली में देखों भीड़ घटती जाती है .
[शायद अन्ना का करा धरा है सब ]
                                                      शिखा कौशिक 
                                    

2 टिप्‍पणियां:

एम सिंह ने कहा…

क्या कहिये ऐसे नेताओं का, जिनकी हकीकत छिपी रहे
नकली चेहरा सामने आये, असली चेहरा छिपा रहे

मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है -
मीडिया की दशा और दिशा पर आंसू बहाएं
भले को भला कहना भी पाप

शालिनी कौशिक ने कहा…

aisa lagta hai kiaap netaon par hi d-lit karengi.badhai.safal hongi.