चेले और शागिर्द

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

राजनीति की प्यास


पी.एम्. बनने की मुझे रहती थी बड़ी आस ,
पर जनता ने कर दिया सारा सत्यानाश ,
साथी सब ये कह रहे 'ले लो अब सन्यास '
पर मेरी बुझती   नहीं राजनीति की प्यास .
                    शिखा कौशिक http://netajikyakahtehain.blogspot.com/
                            

3 टिप्‍पणियां:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

शिखा कौशिक की बात निराली है
नेता जी की पोल खोल डाली है .

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सार्थक प्रस्तुति .विचारणीय पोस्ट आभार ...

Minakshi Pant ने कहा…

neta ki yahi pyas to inhe yahaan tak le aati hai dost