चेले और शागिर्द

शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

बाबा रामदेव समझें विनम्र व् नामर्द में अंतर

बाबा रामदेव की कोई भाषिक मर्यादा है या नहीं .देश के सम्मानीय व्यक्तियों के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग उन्हें सबकी नज़रों में गिरा रहा है -
''रामदेव ने पीएम को कहा 'नामर्द', राहुल के बारे में बोले- मैडम का शहजादा कुछ ज्‍यादा ही कूद रहा''
योग गुरु के रूप में प्रसिद्धि पाने वाले बाबा रामदेव ने अपने अनर्गल बयानों से ये साबित कर दिया है कि हर व्यक्ति राजनीति में आने लायक नहीं होता .राजनीति में आपको विपक्षियों के प्रति भी शिष्ट भाषा का प्रयोग करना होता है .पिछले दिनों राहुल जी ने विनम्रता के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को यह सन्देश दिया था कि'' भाषा की मर्यादा को बनाये रखा जाये .'' राहुल जी स्वयं भी इस बात का ध्यान रखते हैं इसीलिए दागी सांसदों को बचाने के लिए लाये गए अध्यादेश पर दी गयी अपनी साहसपूर्ण प्रतिक्रिया में प्रयोग किये गए अपने शब्दों पर उन्होंने स्वीकार किया- As an afterthought, I agree it was a mistake to use harsh words but I have a ... Rahul was at pains to explain that his comment was not aimed at Prime ... My relations with the prime minister are based on fundamental respect ...-''
बाबा रामदेव को आवश्यकता है राहुल जी से शिष्ट आचरण सीखने की न कि उनकी अनर्गल आलोचना करने की .बाबा रामदेव को डॉ.मनमोहन सिंह जी के प्रति प्रयोग किये अमर्यादित शब्दों के लिए तत्काल माफ़ी माँगनी चाहिए और विनम्र व् नामर्द में अंतर समझना चाहिए .
शिखा कौशिक 'नूतन

4 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

यह सब अरबपति हैं और सत्ता चाहिए . . .
उसके बाद देश से भर्ष्टाचार समाप्त हो जाएगा !!!इस देश में इस पर यकीन करने वाले कम नहीं हैं !
शुभकामनायें देश को !

सतीश सक्सेना ने कहा…

यह सब अरबपति हैं और सत्ता चाहिए . . .
उसके बाद देश से भर्ष्टाचार समाप्त हो जाएगा !!!इस देश में इस पर यकीन करने वाले कम नहीं हैं !
शुभकामनायें देश को !

भारत योगी ने कहा…

बाबा रामदेव ने जो भी कहा हे बिलकुल सही कहा हे आप कोनसे शिष्टाचार की बात कर रहे हें वो भी उस वैय्क्ति के लिए जिसका पूरा खानदान ही भ्रस्टाचार में लिप्त हे हमारे देश के प्रधानमन्त्री गूंगे और बहरे हें ना तो इनको सहिदों की विधवाओं की आवाज सुनाई देती हे न ही रोती हुई भारत माता के आंसूं जो राजा देश की रक्षा न क्र्पाए उसको क्या कहा जाए नपुंसक और नामर्द ही कहा जायेगा

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

में आपकी इस बात से इतफाक रखता हूँ की शब्दों की मर्यादा तो होनी चाहिए लेकिन साथ में आपको याद भी दिलाना चाहूँगा कि शब्दों की मर्यादा दोनों और से ही खंडित हुयी है !