चेले और शागिर्द

शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

शिंदे दिग्गी को कोटि कोटि धिक्कार



शिंदे दिग्गी तुमको है कोटि कोटि धिक्कार ,
भगवा संग आतंक जोड़ना तुमको है स्वीकार !
किसकी तुम संतान हो कुटिल नीच मक्कार ,
दिए नहीं परिवार ने तुमको कोई संस्कार ?

        शिखा कौशिक 'नूतन'

3 टिप्‍पणियां:

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

संस्कारों से अब नहीं कोई इनका वास्ता है !!
इनको तो दिखाई देता राजनीति का रास्ता है!!

शालिनी कौशिक ने कहा…

एकदम सही बात कही है आपने .गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें
फहराऊं बुलंदी पे ये ख्वाहिश नहीं रही .


कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि में …….

रविकर ने कहा…

शुभकामनायें डा. ||

बाशिंदे अतिशय सरल, धरम-करम से काम ।
सरल हृदय अपना बना, देखे उनमें राम ।

देखे उनमें राम, नम्रता नहीं दीनता ।
दीन धर्म ईमान, किसी का नहीं छीनता ।

पाले हिन्दुस्थान, युगों से जीव-परिंदे ।
है सभ्यता महान, बोल अब तो-बा-शिंदे ।।