चेले और शागिर्द

मंगलवार, 24 मई 2011

नेता जी का फेवरेट गेम -भ्रष्टाचार

नेता जी का फेवरेट गेम -भ्रष्टाचार 

खेलों में एक खेल है ;भ्रष्टाचार का खेल ,
न गारंटी जीत की ;दिग्गज होते फेल ,
बंधन वैसे कुछ नहीं ;खेलें मेल-फीमेल,
जो न खेलें ठीक से हो जाती है जेल ,
नेताओं का फेवरेट ;नित बनते कीर्तिमान ,
भारत के नेताओं ने सब कर लिए अपने नाम .
                                               शिखा कौशिक 

शनिवार, 21 मई 2011

फूलों सी बच्ची को जेल

फूलों सी  बच्ची   को  जेल  ! 

आज तो एक निवाला भी निगला न जायेगा ;
हर घडी बस बच्ची का ख्याल आएगा ,
फूलों सी मेरी बच्ची;काँटों से भरी जेल ;
ए. सी.में रहने वाली गर्मी को रही झेल ,
एक छोटा सा घोटाला ;इतनी बड़ी सज़ा !
अब राजनीति मुझको लगती है बेमज़ा .
                                        शिखा कौशिक 

बुधवार, 11 मई 2011

बिटिया की चिंता

बिटिया की चिंता 



बिटिया थोडा संभलकर करना था सब काम ,
कैसे भ्रष्टाचार में आया तेरा नाम ?
राजनीति शतरंज पर बिगड़ गया है खेल ,
मेरी है चिंता यही तुझे हो जाये न जेल !
                        
                           शिखा कौशिक 

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

नेता जी का खुलासा

नेता जी का खुलासा 

                                    
खुले में हँसते है और अन्दर रोते हैं ,
राजनीति के खेल बड़े गंदे होते हैं ,
जो गले मिलते हैं गला भी काट लेते हैं ,
काम पड़ता है तो तलवा भी चाट लेते हैं .

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

नेता जी की परेशानी

नेता   जी   की  परेशानी 
       कभी नेता जी कहकर जो सिर पर बिठाते थे ,
        बड़ा सम्मान देकर अपने घर बुलाते थे ,
      चरण छूते थे और जान भी लुटाते थे  ,
     वही जनता हमें अब आँख क्यों दिखाती है ?
    मेरी रैली में देखों भीड़ घटती जाती है .
[शायद अन्ना का करा धरा है सब ]
                                                      शिखा कौशिक 
                                    

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

नेताओं पर विश्वास रखिये

आडवानी की बात में लगता है मुझे दम ,
देता हूँ बिना शर्त ही उनको समर्थन ,
मैं भी सच ही कह रहा सच्ची है यह बात ,
सब नेता नहीं कर रहे विश्वासों से घात .
                         शिखा कौशिक
http://netajikyakahtehain%20.blogspot.com/

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

नेता ह्रदय शूल ''अन्ना'

नेता ह्रदय शूल ''अन्ना'
सत्ता-सुख का चूस रहे थे हम सब मिलकर गन्ना ,
भ्रष्ट आचरण से पूरी की हमने हरेक तमन्ना ,
लेकिन अब तो सारी जनता कहती हमें निकम्मा ,
हाय ह्रदय में शूल सा चुभता हमको तो ये ''अन्ना'.
                                   
                                          शिखा कौशिक
http://netajikyakahtehain.blogspot.com/