चेले और शागिर्द

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शनिवार, 21 मई 2011

फूलों सी बच्ची को जेल

फूलों सी  बच्ची   को  जेल  ! 

आज तो एक निवाला भी निगला न जायेगा ;
हर घडी बस बच्ची का ख्याल आएगा ,
फूलों सी मेरी बच्ची;काँटों से भरी जेल ;
ए. सी.में रहने वाली गर्मी को रही झेल ,
एक छोटा सा घोटाला ;इतनी बड़ी सज़ा !
अब राजनीति मुझको लगती है बेमज़ा .
                                        शिखा कौशिक