चेले और शागिर्द

रविवार, 10 जुलाई 2011

दलितों की खैरख्वाह !

दलितों की खैरख्वाह !



दलितों के घर जाने का केवल मुझको अधिकार ;

मैं ही उनकी खैरख्वाह ;मुझको ही उनसे प्यार ;

राहुल की पदयात्रा -दलित प्रेम सब ढोंग;

मैं मीठी मिश्री सदृश ;राहुल है तीखी लौंग .


फ्लॉप शो !


ये तो था एक फ्लॉप शो -मेरी है ये राय ,
पंचायत ये थी कहाँ ?कोई मुझे समझाए ,
टिकट दीवाने थे जुटे ,न मजदूर -किसान
मैं सी.एम्.प्रदेश की, मुझको है सब पहचान .

शिखा कौशिक

शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

दयानिधि के इस्तीफे में देरी क्यों ?

दयानिधि के इस्तीफे में देरी क्यों ?



मैं तो सीधा -सच्चा हूँ ;

क्या जानूं क्या घोटाला ?

ऊपर से लगवा डाला

मैडम ने मुंह पर ताला ;

इस्तीफे लेने में मुझसे

हो गयी देर -सबेर ;

मेरे घर में ''देर '' है

पर नहीं कभी अंधेर .


शिखा कौशिक

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बुधवार, 6 जुलाई 2011

''जब लालू मैट सोनिया ''

''जब लालू मैट सोनिया ''
Lalu Prasad Yadav

इनको बत्ती चाहिए वो भी केवल  ''लाल '';
इसके बिन हो गया है ''लालू'' का हाल बेहाल ;
''मैडम'' से क्या बात हुई ?पूछो नहीं सवाल !
दाल में काला नहीं ,ये पूरी काली दाल .

                                           शिखा कौशिक 
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सोमवार, 4 जुलाई 2011

नेताओं के बयान !

नेताओं के बयान !


नेता अब हैं दे रहे सुन्दर-सुन्दर बयान ;
क्यों नहीं पूछा अन्ना से आप हैं कौन महान ?
लालू कहते छोड़ दो लेना अन्ना का नाम ,
वे थे ज्ञानी बहुत बड़े जो लिख गए संविधान .

                                             शिखा कौशिक 
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रविवार, 3 जुलाई 2011

स्वामी जय लोकपाल हरे !

स्वामी जय लोकपाल हरे !

लोकपाल भगवान के अन्ना बने पुजारी ;
भगवन ! तुम रक्षा करो ;बढ़ गए भ्रष्टाचारी ,
''कमल'' चढ़ावत  चरण में ;तुम्ही आस हमारी ,
''हाथ '' साथ न देत है ;विपदा पड़ गयी भारी.

                                  शिखा कौशिक  

शनिवार, 2 जुलाई 2011

जसवंत की राय

Jaswant Singh
जसवंत की राय 

कहते हैं जसवंत सिंह ये तो है अन्याय ,
बी.जे.पी. से अलग है उनकी तो ये राय ,
कनिमोझी और राजा को कैसे भेजा जेल ?
दोनों थे बस खेलते भ्रष्टाचार का खेल ,
साधारण ये खेल है ;न हत्या और डकैती ,
जब कोर्ट सुन रही मामला ,क्यों नहीं जमानत होती ?

                                           शिखा कौशिक 
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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

कल्याण की उत्तराधिकारी !

कल्याण की उत्तराधिकारी !

मैं उनकी पुत्री सदृश ;वे हैं पिता समान,
उनको लगता है बुरा ग़र हो मेरा अपमान ,
करती आई हूँ सदा मैं  भी उनका सम्मान;
वारिस बन अब करूंगी सबका मैं कल्याण .

                                          शिखा कौशिक 
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