चेले और शागिर्द

रविवार, 28 अक्टूबर 2012

WELCOME RAHUL JI AS CONGRESS PARTY NEW WORKING PRESIDENT.


.WELCOME  RAHUL JI AS CONGRESS PARTY NEW WORKING PRESIDENT.

RAHUL GANDHI WITH A VISION FOR COMMON PEOPLE
[http://www.facebook.com/pages/RAHUL-GANDHI-WITH-A-VISION-FOR-COMMON-PEOPLE]

YESTERDAY I WAS SURE THAT SHRI RAHUL GANDHI WOULD TAKE OATH AS A CABINET MINISTER BUT HE DID'NT .ONE THING IS CERTAIN THAT ONLY A LEADER LIKE RAHUL JI CAN DO SO IN PRESENT INDIAN POLITICS .HE HAS CHOSEN THE PATH OF PUBLIC SERVICE DIRECTLY .RAHUL JI HAS PROVED AGAIN THAT WHY IS HE AN IDEAL LEADER .HE IS REALLY A YOUTH ICON .HE PREFERS TO STRENGTHEN PARTY ORGANIZATION .MESSAGE IS CLEAR HE BELIEVES IN HARD WORK .I APPRECIATED HIS BOLD DECISION AND CONGRATULATE HIM FOR HIS FIRM DETERMINATION .RAHUL JI HAS GIVEN RIGHT ANSWER TO OPPOSITION'S IRRELEVANT ALLEGATIONS THAT GANDHI FAMILY IS HUNGRY FOR POWER .
                                               I PRAY INDIA MUST ACHIEVE NEW HEIGHTS OF PROGRESS IN HIS GREAT LEADERSHIP .WELCOME  RAHUL JI AS CONGRESS PARTY NEW WORKING PRESIDENT.


[[http://www.facebook.com/pages/RAHUL-GANDHI-WITH-A-VISION-FOR-COMMON-PEOPLE]

IF INDIAN POLITICS IS A VAST DESERT 
HE IS A DROP OF WATER .

[यदि भारतीय राजनीति एक विशाल रेगिस्तान है 
तो राहुल जी जल की एक बूँद  है ]

IF INDIAN POLITICS IS DARK NIGHT 
HE IS A SHINING STAR.

[यदि भारतीय राजनीति एक अँधेरी निशा है 
तो राहुल जी एक चमकता हुआ सितारा हैं ]

IF INDIAN POLITICS IS AUTUMN 
HE IS SPRING .

[यदि भारतीय राजनीति पतझड़ है 
तो राहुल जी बसंत  हैं ]

IF INDIAN POLITICS IS A KINGDOM 
HE IS THE KING .

[यदि भारतीय राजनीति एक साम्राज्य है 
तो राहुल जी राजा हैं ]

IF INDIAN POLITICS IS AN OYSTER 
HE IS A PEARL .

[यदि भारतीय राजनीति एक सीप है 
तो राहुल जी मोती हैं ]

HE IS SENSIBLE ,HONEST AND PATIENT 
I AM HIS ADMIRER , DO'NT THINK ME SYCOPHANT .

[राहुल जी समझदार हैं ,ईमानदार हैं  और धैर्यवान हैं ,
मैं उनकी प्रशंसक हूँ ,मुझे चापलूस न समझें ]

                                                   JAY HIND ! JAY BHARAT 
                                                     SHIKHA KAUSHIK 

रविवार, 30 सितंबर 2012

राजनीति के पूनम पांडे हैं मोदी !



राजनीति के  पूनम  पांडे हैं  मोदी  !

ये  भाजपा  के केंद्रीय  नेताओं  की  पंक्ति  में खड़े  न  हो पाने  का मलाल  है  या  ख़बरों  में बने  रहने  की अति  उत्सुकता  ? जो भी हो गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र  मोदी का आचरण  लगभग  वैसा  ही  है जैसा  मॉडलिंग  जगत में जगह बनाने हेतु पूनम पांडे का ट्विटर पर अपनी स्त्री देह का अनुचित इस्तेमाल करना .मोदी जी गाँधी परिवार पर तीखे व् सीधे प्रहार कर अपने प्रशंसकों को लुभा सकते हैं पर एक कद्दावर नेता का सिर्फ एक परिवार को लेकर  इतना आक्रामक होना न तो भारतीय  राजनीति के लिए शुभ है और न ही उस नेता के लिए .क्या मोदी के पास अपना राजनैतिक कद और बढ़ाने के लिए कोई और मुद्दा नहीं है .क्या वे केवल मीडिया में छाकर अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं से आगे निकल पायेंगें ?शायद नहीं .मोदी जी ध्यान दीजिये पूनम पांडे ट्विटर पर अपने अर्ध नग्न फोटो अपलोड कर केवल फौलोवर जुटा सकती है पर जब प्रतिस्पर्धा की बात आएगी तब उसे रैम्प पर अपने से ज्यादा योग्य मॉडल्स से सामना करना होगा .मोदी जी गाँधी परिवार के साथ साथ ''केंद्र में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए'' पर गहनता से विचार कर आगे बयान दें तो शायद आप भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर पायेंगें .

                                                                                     शिखा कौशिक 

सोमवार, 17 सितंबर 2012

मोदी ने मढ़ दिया राहुल के सिर पर दोष


   मोदी ने  मढ़ दिया राहुल के  सिर पर  दोष
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दिग्गी-अल्वी ने हरे मोदी मन के मोद ,
'क्षेत्रीय  नेता कहा ' आया मोदी  को  क्रोध  ,
राष्ट्रीय बनने का  मिल न पाया सम्मान ,
मोदी  को  चुभता  रहा  अन्दर  से  ये  अपमान  ,
बीजेपी  की  अंतर्कलह  पर  मोदी  को  है  रोष  ,
पर  विचलित  हो  मढ़ दिया राहुल के  सिर पर  दोष  !!
                                            शिखा कौशिक   

जय हो नेताओं की ''ये सरकार चलाते हैं ''

65th Independence Day celebration
मनमोहन  सिंह  मौन  अपनाते  हैं ,
शिंदे  अभिव्यक्ति की हदें पार कर जाते  हैं ,,
सुषमा  जेटली  राजनीति  चमकाते  हैं , 
ममता  मुलायम दिन रात धमकाते  हैं ,
और  इधर यूं.पी. .में अखिलेश व्यर्थ में मुस्कुराते हैं,
महाराष्ट्र में राज द्वेष  फैलाते हैं ,
गुजरात में मोदी जनता को लुभाते हैं 
जय  हो नेताओं की ''ये सरकार चलाते   हैं ''
इनके भरोसे देश छोड़  हम चैन से सो जाते हैं !!!

बुधवार, 12 सितंबर 2012

राहुल पर प्रहार -ब्रिटिश मीडिया ! तुझको है धिक्कार !

 The Economist

राहुल  पर प्रहार -ब्रिटिश मीडिया ! तुझको है धिक्कार !

राहुल  पर प्रहार -ब्रिटिश मीडिया ! तुझको है धिक्कार!

'इकोनोमिस्ट' कर  रही  राहुल  पर प्रहार  ,
'राहुल एक समस्या'  कह करती  दुष्प्रचार  '
भारतीय जन नेता पर लांछन  की  बौछार  ,
कुटिल  ब्रिटिश  ओ मीडिया !तुझको है धिक्कार , 
भारतीय अब सजग हो ये वही  ब्रिटिश संस्कार ,
'फूट डाल कर राज करो' था जिनका हथियार .

                                   shikha kaushik 

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

तू भत्ता-भात खा मस्त हो मै भोगूं सत्ता-सुख !


तू भत्ता-भात खा मस्त हो 
  मै  भोगूं सत्ता-सुख  ! 

  


''यू. पी.'' ''सी एम्'' ने चला देखो तुरुप का पत्ता ,
बेरोजगारों को दिया  बेरोजगारी भत्ता ,
भत्ता-भात खा मस्त हो क्या काम की चिंता 
पांच साल आराम से मै भी भोगूं सत्ता .
                                                 शिखा कौशिक 

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

'' राहुल को लाना होगा अपनी कार्यशैली में बड़ा अंतर ''



यह  स्वागत  योग्य  है  कि श्री  राहुल गाँधी भारतीय राजनीति में एक बड़ी भूमिका के लिए तैयार हैं किन्तु बड़ी भूमिका के साथ  साथ उन्हें  अपनी  कार्य  शैली  में भी  बड़ा  अंतर  लाना  होगा  .पिछले  दिनों  श्री सलमान  खुर्शीद  द्वारा की गयी टिप्पणी को भी सकारात्मक  नज़रिए  से देखा जाना चाहिए .राहुल को अब जुगनू की भांति नहीं सूर्य की भांति चमकना होगा .उन्हें जनता के समक्ष निरंतर उपस्थित रहना होगा .यूं.पी. के चुनाव के बाद एक माह तक गायब रहना जनता में यह सन्देश प्रेषित करता है कि-'हमारा नेता गंभीरता के साथ हमारी समस्याओं के प्रति जागरूक नहीं है' -


'जुगनू नहीं तू आफ़ताब बन चमकना सीख 
करनी है सियासत तो कुछ दांव-पेंच सीख '

                                         राहुल जी को अपने व् अपने परिवार के खिलाफ लगाये जाने वाले आरोपों का भी खुलकर विरोध करना होगा क्योंकि उनकी चुप्पी को इस रूप में प्रसारित किया जाता है कि 'यदि ये आरोप निराधार हैं तो राहुल व् गाँधी परिवार इनका विरोध क्यों नहीं करता '-

       दुश्मन  लगाना चाह रहा दामन पर तेरे दाग 
          मायूस हो यूं चुप न बैठ पुरजोर आज चीख '

                                                      देश कि सभी प्रधान  समस्याओं पर अपने नज़रिए से राहुल जी को चाहिए कि वे जनता को अवगत कराते रहे  .ये न हो कि --भट्टा परसौल पर तो आप अपना विरोध दर्ज कराये पर दिल्ली पुलिस द्वारा रामलीला मैदान में आम जनता पर मध्य रात्रि में किये गए अत्याचार पर कुछ न कहें .आपको महगाई जैसे मुदों पर अपनी राय से जनता को अवगत कराना चाहिए ताकि जनता में यह सन्देश जाये कि 'हमारा प्रिय नेता हमारी समस्याओं के प्रति संवेदनशील है '-


'तू वतनपरस्त है  कर मुल्क़ की ख़िदमत 
मुफ़लिसी पर चोट कर ना मांगें कोई भीख '

                

   राहुल जी को यह भी ध्यान रखना होगा कि 'वे एक राष्ट्रीय नेता हैं '.किसी भी प्रदेश के चुनावों में उन्हें स्वयं को झोंक देने की जरूरत  नहीं है .उनका काम है राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना ,अनुशासित करना .उत्तर प्रदेश के हाल में हुए चुनावों में राहुल जी ने तो अपनी सारी ताकत झोक दी और प्रदेश के पार्टी नेता हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे जिसके कारण राहुल जी की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया -

              '  मासूम  रियाई की मक्कारियों से बच 
                   कई खा  चुके हैं धोखा इसकी गवाह तारीख़ '

                                     राहुल जी को अपने आस पास चापलूसों,चाटुखोरों के जमावडे को भी रोकना होगा .उन्हें जनता के सीधे संपर्क में रहना होगा तभी आने वाले कल में वे पूरे भारत को कुशल नेतृत्व देने में सक्षम हो पायेंगें -
'अपने में ला सिफत सिफलों  को दूर रख 
तेरी फ़िरासत देखकर दुश्मन भी जाये रीझ '
                                               शिखा कौशिक