नेता जी की शादी है
जनता का बैंड बजेगा ,
नोटों की माला से दुल्हन
का roop सजेगा ,
मंडप के स्थान पर
मंच पे होंगें फेरे ,
फिर तारों की छाँव में
उनका भाषण होगा .
[हमाले नेता जी की छादी में जलूल-जलूल आना ----जनता ]
राजनीति में आकर हर खेल खेल जाते हैं ;
जीत न मिली तो भारी हार झेल जाते हैं ,
जिनके खिलाफ बोलकर हम वोट मांगते हैं
वो सामने पड़ जाये तो ''सद्भाव '' दिखाते हैं .
शिखा कौशिक
http://netajikyakahtehain.blogspot.com/
हर चाल मैं चलता हूँ ,चुनाव जीत जाऊं ;
मैं नोट बांटता हूँ ,मदिरा भी मैं पिलाऊं ;
यूँ हाथ जोड़ता हूँ पर दंगें भी कराऊँ ;
क्या-क्या हैं करामातें !अब और क्या बताऊँ ?
शिखा कौशिक
''म'' से मनमोहन बने ,''म'' से बने महंगाई ,
''म'' से मैडम की चले ,''म'' मुख कही न जाई ,
''म'' से मीडिया भी बने ,मंद-मंद मुस्काई ,
''म'' से हैं मजबूरियां ,''म'' मत पूछो भाई .
[नेता जी की और से ''म'' महाशिवरात्रि की बधाई ]
शिखा कौशिक
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