चेले और शागिर्द

मंगलवार, 21 अप्रैल 2015

किसान रैली ने हिला दी मोदी सरकार

Rahul Gandhi, Sonia Gandhi and Manmohan Singh at the kisan rally

पिछले लोकसभा चुनाव [मई २०१४] में बीजेपी के हाथों भारी पराजय की चोट खाई कॉंग्रेस पार्टी १९ अप्रैल २०१५ को दिल्ली में हुई ''किसान -खेतिहर मजदूर रैली '' में पहली बार अपने पुराने रंग में दिखी . सर्वाधिक वर्षों तक भारतीय जनता की प्रिय पार्टी रही कॉंग्रेस और इसके जोशीले -गरिमामय नेतृत्व ने इस रैली के माध्यम से यह साबित कर दिया कि यदि कोई पार्टी जनता से ''अच्छे दिनों का '' झूठा वादा कर , उनसे बहुमत पाकर , सत्ता मद में इतना डूब जाये कि बेमौसम बरसात के कारण देश के अन्न-दाता की दुर्दशा को देखकर भी नज़रअंदाज़ करने लगे और किसानों की ज़मीनों को पूजीपतियों को सौपने की साज़िश रचने लगे तब किसानों की सच्ची हितैषी पार्टी कॉंग्रेस अपने दम पर ऐसी मदांध पार्टी को न केवल ललकारेगी बल्कि एक-एक जिम्मेदार शख्स को सत्ता के गलियारों से घसीट कर जनता के बीच लाकर खड़ा कर देगी .
     एक भी किसान आज अगर अपनी फसले बर्बाद होने पर आत्म-हत्या कर रहा है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी .ये आत्म-हत्या नहीं बल्कि सरकार की लापरवाही के कारण उसके द्वारा की जा रही हत्या है .ऐसे में सरकार को चेताने और भूमि-अधिग्रहण अध्यादेश की किसान विरोधी बातों को किसानों तक पहुँचाने के लिए आयोजित ''किसान रैली '' ने मोदी सरकार को हिला डाला , तभी तो श्री मोदी अपनी खिसियाहट  छिपाने के लिए यह कहते नज़र आये '' कि हम किसानों की ज़मीने अम्बानी जैसों के लिए नहीं ले रहे '' तो क्या वे ''अडानी जैसों '' के लिए ले रहे हैं ?
     कॉंग्रेस  ने निराश-हताश किसानों के दिलों में फिर से न्याय -प्राप्ति की अलख जगाई है .अब यह कॉंग्रेस पार्टी व् इसके मजबूत नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की लड़ाई को मंज़िल तक पहुंचाए .सोनिया जी व् राहुल जी के नेतृत्व में ऐसा ही होगा -ऐसी हर भारतीय की शुभकामना है -
            खुले हाकिम की मक्कारी ,
         गिरे साज़िश की दीवारें !
        हमारे मुल्क की किस्मत 
          हमारे ''हाथ '' में होगी !


जय हिन्द !जय भारत !

शिखा कौशिक 'नूतन' 

सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

बढ़ता भ्रष्टाचार -उत्तरदायी हम !


बढ़ता  भ्रष्टाचार  ...जिम्मेदार कौन   !

हम अक्सर अपने देश की विकास गति बाधित होने ; समस्याओं का समाधान न होने अथवा भ्रष्टाचार के लिए अपने नेताओं को पूर्णरूप से उत्तरदायी ठहरा देते हैं;किन्तु सच्चाई के साथ स्वीकार करें तो हम भी कम जिम्मेदार  नहीं है. पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक कितने मतदाता है जो अपने घर आए प्रत्याशी से साफ-साफ यह कह दें क़ि हमें अपने निजी हित नहीं सार्वजानिक हित में आपका योगदान चहिये.हम खुद यह सोचने लगते है क़ि यदि हमारा जानकर व्यक्ति चुन लिया गया तो हमारे काम आसानी से हो जायेंगे.चुनाव -कार्यालय के उद्घाटन से लेकर वोट खरीदने तक का खर्चा हमारे प्रतिनिधि पञ्च वर्ष में निकाल   लेते हैं.हमारे प्रतिनिधि हैं ;हममें से हैं-भ्रष्ट  हैं -तो हम कैसे ईमानदार हैं?  नगरपालिका से लेकर लोकसभा तक में हमारा प्रतिनाधित्व करने वाले व्यक्ति उसी मिटटी; हवा; प्रकाश; जल ;से बने हैं-जिससे हम बने हैं. यदि हम ईमानदार समाज ;राष्ट्र  चाहते हैं तो हुमेंपहले खुद ईमानदार होना होगा . हमें खुद से यह प्रण करना होगा क़ि हम अपने किसी काम को करवाने के लिए रिश्वत-उपहार नहीं देंगे;यहाँ तक क़ि किसी रेस्टोरेंट के वेटर को टिप तक नहीं देंगे. ये टिप ;ये उपहार; रिश्वत- सरकारी  निजी विभागों   में बैठे  कर्मचारियों;वेटर; प्रत्येक विभाग  के ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियोंमे लोभ रूपी राक्षस को जगाकर भ्रष्टाचार  का मार्ग प्रशस्त करते हैं.टिप पाने वाला आपका काम अतिरिक्त स्नेह से करता है किन्तु अन्य के प्रति ;जो टिप नहीं दे सकता ; उपेक्षित व्यवहार  करता है ...मतलब  साफ़ है प्रत्येक    के प्रति समान कर्तव्य निर्वाह -भाव से बेईमानी. सरकारी नौकरी लगवानी हो तो इतने रूपये तो देने ही होंगे-ऐसे विवश-वचन प्रत्येक  नागरिक के मुख पर है.क्यों नहीं हम कहते क़ि नौकरी लगे या न लगे मैं एक भी पैसा नहीं दूंगा..कुछ लोग इस सम्बन्ध में हिसाब लगाकर कहते हैं-एक बार दे दो फिर जीवन भर मौज करो! किन्तु आप यह रकम देकर न केवल किसी और योग्य का पद छीन रहें हैं बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी भी भ्रष्टाचार संस्कार रूप में दे रहें हैं. ईश्वर-अल्लाह-गुरुनानक-ईसा मसीह---- जिसके भी आप भक्त हैं ;जिसमे भी आप आस्था रखते हैं; उनके समक्ष खड़े होकर ;आप एकांत   में यदि यह कहें क़ि मैने  ये भ्रष्ट आचरण इस कारण या उस कारण किया है तो प्रभु हसकर कहेंगे--यदि तूने  कुछ गलत नहीं किया है तो मुझे बताकर अपने कार्य को न्यायोचित क्यों ठहराना चाह रहा है. अत: अपनी आत्मा  को न मारिये !भ्रष्टाचार को स्वयं के स्तर से समाप्त करने का प्रयास कीजिये.

शिखा  कौशिक  'नूतन '

बुधवार, 21 जनवरी 2015

जीत तो दिल्ली की जनता की ही होगी !


दिल्ली की जनता जैसा  भाग्यशाली कौन होगा ! आने वाले चुनावों  में मुख्यमंत्री पद पर जिन तीन प्रत्याशियों के नाम सामने आये हैं वे तीनों ही -ईमानदार हैं , काबिल हैं .  आखिर दिल्ली की जनता को ही  श्रेय जाता है कि उसने बीजेपी को विवश किया कि वो एक ईमानदार व् साफ़ छवि वाली किरण बेदी जो मुंख्यमंत्री के रूप में पार्टी का चेहरा बनाये .दूसरी और कॉंग्रेस ने भी शीला दीक्षित युग से बाहर आते हुए अजय माकन जी को पार्टी का चेहरा बनाया है .हालाँकि जनता की इस मांग को पार्टी में मनवाने के लिए राहुल जी को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है . तीसरी और सबसे विस्फोटक ईमानदार पार्टी ''आप'' के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अरविन्द केजरीवाल जी  के बारे में क्या कहना ! वे तो हैं ही जनता का प्रोडक्ट . जो भी पार्टी जीते ये तो निश्चित है कि दिल्ली को एक काबिल व् ईमानदार मुंख्यमंत्री मिलेगा .इससे बढ़कर भारतीय-राजनीति के लिए और क्या सुखद समाचार हो सकता है .

शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 18 जनवरी 2015

''किरण की लोकप्रियता दांव पर !''



राजनीति में आकर किरण बेदी जी ने अपनी लोकप्रियता दांव पर लगा दी है . यदि वे अपने बल पर बीजेपी को दिल्ली में बहुमत दिला पाती हैं तब उनकी जय-जयकार पक्की है किन्तु यदि वे इसमें असफल होती हैं तब उनका राजनैतिक कैरियर यही समाप्त हो जायेगा . अपनी कार्यशैली अथवा योग्यता के आधार पर समाज में लोकप्रियता हासिल करने वाले व्यक्ति जब भी राजनीति में आये उन्हें एक सीमा के बाद इससे किनारा  करना पड़ा .किरण बेदी जी एक ईमानदार व् काबिल अधिकारी रही हैं .वे दिल्ली की मुख्यमंत्री बनें तो दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की गरिमा को बढ़ाएंगी किन्तु राजनीति में ऐसे ईमानदार व्यक्ति को किस तरह से प्रताड़ित किया जाता है ऐसे  कई उदाहरणों से भारतीय-राजनीति का  इतिहास  भरा पड़ा है . राजनीति के शातिर खिलाडी इन लोकप्रिय चेहरों को पार्टी की जीत के लिए इस्तेमाल करते हैं और जब ये उनकी पार्टी को जीत दिला देते हैं तब पार्टी-अनुशासन के नाम पर इनकी कार्य-शैली को निशाना बनाया जाता है .किरण जी ने अपने पहले राजनैतिक कदम में ही बहुत बड़ा जोखिम उठा लिया है .यदि खुलकर कहें तो उनसे ये उम्मीद नहीं थी .

शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 11 जनवरी 2015

''राहुल बनें कॉंग्रेस-अध्यक्ष ''


होर्डिंग से खड़ा किया नया विवादImage result for rahul gandhi free images


मंगलवार [दिनाँक -१३ जनवरी २०१५] को आयोजित होने वाली कॉंग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक में जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण विचारणीय  मुद्दा होगा -वह होगा पार्टी के नेतृत्व सम्बन्धी  लिए जाने वाले निर्णय का .एक ओर कानपुर में पार्टी के प्रमुख नेता राजीव शुक्ला जी ने बयान दिया है कि पार्टी नेतृत्व में क्या बदलाव किया जाये इस पर निर्णय केवल सोनिया जी व् राहुल जी लेंगें वहीं पार्टी के अनेक कार्यकर्त्ता प्रियंका गांधी जी को पार्टी की कमान सौपने की मांग लेकर जोशीला अभियान चला रहे   है . अब प्रश्न यह उठता   है कि   अपने सबसे बुरे दौर से गुजरती हुई देश की सबसे बड़ी पार्टी की नैय्या पार लगाने  में कौन सक्षम है  ? कसौटी  पर यदि राहुल जी को खरा बताया जाता है तब इसमें किसी भी प्रकार के मतभेद की सम्भावना नहीं .चुनावों में हार-जीत  के लिए केवल राहुल जी को  जिम्मेदार ठहराना तर्क-संगत नहीं . हमने देखा  कि चुनावों  के पास आते ही दस साल से कितने ही सत्ता का सुख भोग  रहे माननीय नेतागण पार्टी को ठेंगा दिखाकर अपने घर जाकर बैठ गए और राहुल जी व् सोनिया जी देश भर में रैलियां कर पार्टी की नीतियों व् कार्यों का प्रचार अकेले दम पर करते रहे . इसीलिए हार का ठीकरा भी उनके सिर पर फोड़ दिया गया .यदि आप जनता में जाकर पूछें  तो जनता का गुस्सा   उन निठल्ले   नेताओं के प्रति था न कि सोनिया जी व् राहुल जी के प्रति .राहुल जी ने गरीब जनता ,किसानों , महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर पिछले दस सालों में बहुत काम किया है .वे झूठी आशाएं नहीं बँधातें . वे अनुशासित तरीके से देश की व्यवस्था को पटरी पर लाना चाहते हैं .वे केवल अपने को प्रोडक्ट बनाकर प्रचारित नहीं करते .वे सबके सहयोग से देश की तरक्की की बात करते हैं . उनको पार्टी  यदि अध्यक्ष पद पर सुशोभित करना चाहती है तो इससे बढ़कर हर्ष की बात नहीं हो सकती है .प्रियंका जी को तो अभी पार्टी में आकर संगठन में दस साल का योगदान देना चाहिए और राहुल जी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत बनाने में सहयोग करना चाहिए . एक दम से उन्हें पार्टी-अध्यक्ष बना देना उनकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं होगा . पार्टी-कार्यकर्ताओं को भी इस हकीकत को जानना व् समझना चाहिए . जोश में होश न खोएं .

शिखा कौशिक 'नूतन'

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

करीना पर ही क्यों निशाना !

क्यों छापा करीना का चेहरा?
करीना पर ही क्यों निशाना !

लव-जिहाद को संघ ने जितनी  बड़ी इस्लामिक साजिश के रूप में भारत की हिन्दू-संस्कृति के लिए खतरा बताया है उसको देखते हुए विश्व हिन्दू परिषद की महिला  पत्रिका ''हिमालय वाहिनी ' के कवर पेज पर करीना कपूर  का  फोटो  प्रकाशित   करना  कतई  उचित  नहीं   .करीना पहली  अभिनेत्री  नहीं  हैं जिन्होंने  एक  मुस्लिम  पुरुष  से  निकाह  किया  है .उनकी  सास  शर्मीला  टैगोर  उनसे  कम  से  कम  तीन  साढ़े  तीन  दशक  पहले  ऐसा  कर  चुकी  हैं . लव-जिहाद जैसे गंभीर  मुद्दे को किसी एक सेलिब्रिटी से जोड़कर हिन्दू संगठन कोई सार्थक सन्देश भारतीय समाज में प्रेषित नहीं कर रहा है . ये कहना कि युवा वर्ग इनसे प्रेरणा पाकर भ्रमित होता  है नितांत गलत   है .ये युवा वर्ग ही है जो इन अभिनेत्रियों के द्वारा अंग-प्रदर्शन किये जाने पर इनका विरोध करता है .मतलब ये कि हमारा युवा वर्ग अँधा नहीं जो इनके किये हर काम का अन्धानुसरण करे . ये अभिनेत्रियां फैशन आइकॉन बन सकती हैं पर संस्कार रोपने का काम ये नहीं करती .लव-जिहाद यदि एक साजिश है तो इसे हिन्दू परिवार अपनी संतानों में हिन्दू-संस्कार भरकर ही विफल कर सकते हैं . एक प्रश्न यहाँ यह भी उठाया  जा सकता है कि जब बीजेपी के मुस्लिम नेता हिन्दू लड़की से निकाह करते हैं तब विश्व हिन्दू परिषद न तो संज्ञान लेकर हंगामा करती हैं और न ही उन लड़कियों के फोटो को अपनी पत्रिका के कवर पर स्थान देती हैं फिर करीना को ही इतना प्रताड़ित करने की क्या जरूरत है ? वैसे भी धर्म व्यक्तिगत मुद्दा है .यदि करीना को इस्लाम अपनाने में कोई आपत्ति नहीं तब विश्व हिन्दू परिषद क्यों अपने सिर में दर्द करती है . लव-जिहाद कोई साजिश नहीं बल्कि भारतीय हिन्दू परिवारों के  मर्यादित आचरण का खंडित  होना है जिसे केवल हिन्दू परिवार ही पुनः सशक्त कर सकते हैं . दुसरे  धर्मावलम्बियों  को बुराई देने से कोई फायदा  नहीं होने वाला .

शिखा कौशिक 'नूतन'

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

नाम पाकिस्तान है ,तेरा काम-तमाम है !





मुल्क बड़ा शैतान है ,
नाम  पाकिस्तान है !
बरसाता सीमा पर गोले ,
जबकि युद्ध-विराम है !
.............................................
बड़े अकड़कर अलग हुए थे ;
बांटा था जब हिन्दुस्तान !
ज़न्नत जैसी ज़मी को तुमने  ,
बना दिया है कब्रिस्तान !
फिर भी कितना अभिमान है !
नाम पाकिस्तान है !
....................................
अमन-चैन का दुश्मन है ,
झूठों में नंबर वन है ,
आतंक का पर्याय है ,
सबको आँख दिखाए है !
कितना बेईमान है !
नाम पाकिस्तान है !
.......................................
दुनिया भर के आतंकी ,
यहाँ शरण पा जाते हैं ,
मासूमों के कातिल भी ,
''साहिब'' का रुतबा पाते हैं ,
दहशत फैलाना काम है !
नाम पाकिस्तान है !
.................................
अपनी चालों में फंस जाते  ,
अपने बच्चे क़त्ल कराते ,
तब भी मक्कारी न छोड़ें ,
हम पर हैं इल्ज़ाम लगाते ,
दुनिया में बदनाम हैं !
नाम पाकिस्तान है !
....................................
बहकाकर ये नवयुवकों को ,
ज़ालिम दहशतगर्द बनाते ,
भरी जवानी में उनको ये ,
बदनामी की मौत सुलाते ,
देकर 'जिहाद' का नाम हैं !
नाम पाकिस्तान है !
...................................
कितने नीच हैं ये मक्कार ,
छिप-छिप कर करते हैं वार ,
लाशें अपने सैनिकों की
लेने से करते इंकार ,
मानवता पर इल्ज़ाम है  !
नाम पाकिस्तान है !
......................................
मासूमों को बना निशाना ,
खेल रहा क्यूँ खुनी खेल !
बाज़ नहीं आया ग़र बुझदिल ,
देंगें तुझको परे धकेल ,
तेरा काम-तमाम है !
नाम पाकिस्तान है !

जय हिन्द ! जय भारत !

शिखा कौशिक 'नूतन'